बरसो में अपनी सोच बदल न सका
उस रात तमाम में जगा रहा
ख्वाब रहे मुझसे दूर ही
पर ख्यालों में करवट बदल न सका
राह ऐ मंजिल भटक गया
अपने क़दमो के निशानों को मीता न सका
छोड़ गए राह में ही जो बने थे हमसफ़र
ऐसे बिछडा की तमाम उम्र मिल न सका॥